वैदिक विवाह संस्कार

वैदिक हिंदू संस्कृति में विवाह संस्कार का महत्व एवं रीति-रिवाज।

वैदिक परंपरा में विवाह एक पवित्र बंधन है, एक संस्कार है जो दो आत्माओं को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की आजीवन यात्रा में जोड़ता है।

वैदिक विवाह संस्कार के प्रमुख चरण

मंत्रोच्चारण के साथ सम्पन्न होने वाले पवित्र अनुष्ठान।

1
वरमाला व मधुपर्क

वर-वधू द्वारा परस्पर माला पहनाना एवं मधुपर्क (शहद व दही) अर्पण करना।

2
हवन व पाणिग्रहण

अग्निदेव के समक्ष यज्ञ आहुति एवं एक-दूसरे का हाथ थामकर आजीवन साथ निभाने का संकल्प।

3
अग्नि प्रदक्षिणा

पवित्र अग्नि के चारों ओर फेरे लेकर अपने गृहस्थ धर्म की मर्यादाओं का पालन करने की शपथ।

4
सप्तपदी (सात प्रतिज्ञाएं)

सात फेरों के साथ अन्न, बल, धन, सुख-दुख, संतान, प्रेम और मित्रता के सात वचन।

विवाह संस्कार हेतु आवश्यक नियम व शर्ते

  • वर की आयु न्यूनतम 21 वर्ष और वधू की न्यूनतम 18 वर्ष पूर्ण होनी चाहिए।
  • दोनों पक्षों के पास वैध आयु और पते का प्रमाण (जैसे आधार कार्ड, अंकपत्र) होना अनिवार्य है।
  • विवाह संपन्न होने के समय दो वयस्क गवाह (साक्षी) पहचान पत्रों के साथ उपस्थित होने चाहिए।
  • दोनों पक्षों की ओर से आपसी सहमति और स्वेच्छा का घोषणा पत्र प्रस्तुत करना होगा।
महत्वपूर्ण सूचना

आर्य वैदिक सभा प्रयागराज द्वारा जारी विवाह प्रमाण पत्र हिंदू विवाह अधिनियम 1955 के तहत पूरी तरह कानूनी साक्ष्य है। हालांकि, इसे सरकारी मैरिज रजिस्ट्रार कार्यालय में पंजीकृत कराकर कानूनी विवाह प्रमाणपत्र प्राप्त करने का आधार माना जाता है।

विवाह संस्कार सम्बन्धी सामान्य प्रश्न

उत्तर: विवाह की संपूर्ण वैदिक अनुष्ठान प्रक्रिया (हवन, फेरे, सिन्दूर दान) में लगभग 1.5 से 2 घंटे का समय लगता है।

उत्तर: हाँ, वैदिक रीति से विवाह संस्कार सम्पन्न होने और सभी आवश्यक दस्तावेजों के सत्यापन के तुरंत पश्चात प्रमाण पत्र जारी कर दिया जाता है जिसे ऑनलाइन भी सत्यापित किया जा सकता है।

उत्तर: माता-पिता की उपस्थिति स्वागत योग्य है। हालांकि, यदि वे उपस्थित नहीं हो सकते, तो दो वयस्क गवाह (मित्र, रिश्तेदार या पड़ोसी) जिनके पास वैध सरकारी पहचान पत्र (आधार कार्ड आदि) हो, अनिवार्य रूप से उपस्थित होने चाहिए।
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