वैदिक हिंदू संस्कृति में विवाह संस्कार का महत्व एवं रीति-रिवाज।
वैदिक परंपरा में विवाह एक पवित्र बंधन है, एक संस्कार है जो दो आत्माओं को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की आजीवन यात्रा में जोड़ता है।
मंत्रोच्चारण के साथ सम्पन्न होने वाले पवित्र अनुष्ठान।
वर-वधू द्वारा परस्पर माला पहनाना एवं मधुपर्क (शहद व दही) अर्पण करना।
अग्निदेव के समक्ष यज्ञ आहुति एवं एक-दूसरे का हाथ थामकर आजीवन साथ निभाने का संकल्प।
पवित्र अग्नि के चारों ओर फेरे लेकर अपने गृहस्थ धर्म की मर्यादाओं का पालन करने की शपथ।
सात फेरों के साथ अन्न, बल, धन, सुख-दुख, संतान, प्रेम और मित्रता के सात वचन।
आर्य वैदिक सभा प्रयागराज द्वारा जारी विवाह प्रमाण पत्र हिंदू विवाह अधिनियम 1955 के तहत पूरी तरह कानूनी साक्ष्य है। हालांकि, इसे सरकारी मैरिज रजिस्ट्रार कार्यालय में पंजीकृत कराकर कानूनी विवाह प्रमाणपत्र प्राप्त करने का आधार माना जाता है।